Hapur Hulchul Exclusive : हापुड़ के इस डिवाइडर पर कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
हापुड़ में आए दिन डिवाइडर, स्टेपवर्ज और फुटपाथ से भी वाहन टकराते है। ऐसे में उन लोगों की जान को खतरा होता है, जो रात के वक्त फुटपाथ और डिवाइडर पर ही बिस्तर डालकर सो जाते हैं, जबकि जिन लोगों के पास अपना घर या ठिकाना नहीं है। उनके रुकने की कोई व्यवस्था शहर में नहीं की गई है। फुटपाथ, डिवाइडर पर सो रहे लोग अपने साथ ही वाहन चालकों की जान को भी जोखिम में डाल रहे हैं। यहां पर सोते हैं लोग: मुख्य तौर आरतहसील चौराहे से अतरपुरा चौराहा के बिच स्तिथ डिवाइडर के ऊपर ही रोजाना रात को बड़ी संख्या में लोग सोते हुए नजर आते हैं। यहां पर आए दिन हादसे होते हैं, बारिश होने पर स्ट्रीट लाइट भी नहीं जलती है। इसके अलावा अतरपुरा से पक्का बाग़ के बिच भी रात के वक्त कई लोग डिवाइडर पर सो जाते हैं। इस मार्ग पर भी रत केर समय वहां तेज रफ्तार में गुजरते है लेकिन डिवाइडर पर सोने वाले लोगो के लिए ऐसे में जान का खतरा बना रहता है। एसपी कार्यालय, नेशनल हाईवे पर भी ऐसा हाल रोड के बीच बने डिवाइडर पर ही लोग बिस्तर डालकर सोते हुए नजर आते है। रात भर इस रोड पर वाहनों का आवागमन होता है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।ऐसे में लोगों की जान को जोखिम बना हुआ है। हलाकि शहर की हम बाटी करे तो हापुड़ शहर की सड़को पर रात भर पुलिस कर्मी गश्त करते हुए नजर आते है लेकिन डिवाइडर के बिच सोने वाले लोगो पर पुलिस और प्रशानिक अधिकारियो का कोई ध्यान नहीं हैं और तो और ट्रैफिक पुलिस कर्मी भी डिवाइडर के बिच हादसों को न्योता देते इन लोगो को यह सोने से नहीं रोकते है।
इस मार्ग पर पुलिसकर्मी रात में करते है गश्त
बात करे शहर के सबसे व्यस्तम चौराहो की इनमे तहसील चौराहा ,अतरपुरा और पक्का बाग़ शामिल है अतरपुरा चौराहा पर पुलिस टीम के साथ साथ रेलवे रोड चौकी भी स्तिथ हैं लेकिन यह तैनात पुलिस कर्मी भी इस और कोई ध्यान नहीं देते और तो और रात के समय अधिकतर जिले के आलाधिकारी भी इस मार्ग से गुजरते है लेकिन डिवाइडर पर सोते हुए हादसों को न्योता देते इन लोगो पर जिले के आला अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं जाता है ऐसे में इस मार्ग से गुजरने वाले तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर इन लोगो के साथ कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

अधिकारियो का इस और नहीं है कोई ध्यान
अब सवाल यह है की डिवाइडर पर सोते लोगो पर पुलिस लैपर्ड टीम ,पुलिस व् प्रशासनिक अधिकारियों का आखिर कभी ध्यानध्यान क्यों नहीं जाता है क्या आला अधिकारी किसी बड़े हादसे के इन्तजार में है ?
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