
भैया दूज हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक
भैया दूज हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। यह दिवाली के दो दिन बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करती हैं, जबकि भाई उनकी सुरक्षा और खुशहाली का संकल्प लेते हैं।
भैया दूज का महत्व:
1. पौराणिक कथा: भैया दूज से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, यमराज अपनी बहन यमुनाजी के आमंत्रण पर उनसे मिलने पहुंचे थे। यमुना ने उनका स्वागत किया और उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया। यमराज ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि इस दिन भाई-बहन एक-दूसरे से मिलें, तो भाई की उम्र लंबी होगी और बहन को सुख और समृद्धि मिलेगी। तभी से इस पर्व को मनाने की परंपरा है।
2. रक्षा का संकल्प: इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं, और उन्हें मिठाई खिलाकर लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई भी बहनों को उपहार देकर उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं।
3. पारिवारिक और सामाजिक बंधन: भैया दूज परिवार के सदस्यों को करीब लाने का पर्व है। यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और एकजुटता को मजबूत करता है। इस पर्व के माध्यम से भाई-बहन एक-दूसरे के प्रति अपने दायित्वों का सम्मान करते हैं।
4. स्नेह और आशीर्वाद: भैया दूज के दिन का माहौल खुशियों से भरा होता है। बहनें भाइयों के लिए विशेष पकवान बनाती हैं और भाई उन्हें उपहार देकर उनके प्रति अपने स्नेह का इज़हार करते हैं।
इस तरह, भैया दूज भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है और यह उन्हें एक-दूसरे के प्रति समर्पण, स्नेह और विश्वास को मजबूत करने का अवसर देता है।
[banner id="981"]