
यह खबर हापुड़ में न्यायिक प्रक्रिया से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले की है। इसमें गैर इरादतन हत्या के दोषी सूरजभान को सात साल की सजा और 23 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। मामले में शामिल अन्य आरोपी, उनकी पत्नी प्रभा, को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया, जबकि दो अन्य आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।
यह मामला 2006 की घटना से जुड़ा है, जहां सूरजभान और उनकी पत्नी ने मुकेश नाम के व्यक्ति पर बांट चोरी का आरोप लगाया और मोहल्ले के लोगों के साथ मिलकर उसकी पिटाई की थी। पिटाई के बाद झूठा मुकदमा दर्ज कराते हुए मुकेश को पुलिस के हवाले किया गया। जेल में उपचार के दौरान मुकेश की मौत हो गई, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आठ जगह चोट के निशान पाए गए।
इस फैसले से यह संदेश मिलता है कि कानून के तहत दोषियों को सजा मिलती है, चाहे मामला कितना भी पुराना क्यों न हो।