कमपोजिट विद्यालय कानौर गढ़मुक्तेश्वर द्वारा चंद्रयान मॉडल बनाकर दिखाया गया सजीव प्रसारण
Chandrayaan model made and shown by Composite School Kanore Garhmukteshwar
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उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा chandrayaan-3 की लैंडिंग के विद्यालयों में सजीव प्रसारण दिखाए जाने के आदेश दिए गए थे। जिस के क्रम में कमपोजिट विद्यालय कानोर गढ़मुक्तेश्वर के अध्यापकों द्वारा chandrayaan-3मिशन का एक मॉडल बनाया गया और इसके बारे में तकनीकी जानकारी बच्चों को दी गई।
विद्यालय द्वारा सजीव प्रसारण के साथ-साथ मॉडल के माध्यम से बच्चों को बताया गया कि चंद्रयान मिशन का प्रक्षेपण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया और 41दिनों में लंबी दूरी तय करने के बाद 23 अगस्त को यह चंद्रमा की धरती पर उतरा जिसका सजीव प्रसारण इसरो के माध्यम से किया गया। बच्चों को बताया गया किचंद्रयान मिशन का उद्देश्यचंद्रमा की धरती पर मिट्टी पत्थर और खनिज पदार्थ अन्य उपस्थित तत्वों का अध्ययन करनाऔर चंद्रमा पर पानी व बर्फ की स्थिति का पता लगाना है
भारत को उसके लिए बधाई दी
हैइसके माध्यम से चंद्रमा के विषय में अधिक से अधिक जानकारी मिल सके। भारत के सफल मिशन का डंका केवल राष्ट्र में नहीं अपितु समूचे विश्व में हैऔर नासा ने भी भारत को उसके लिए बधाई दी है। अमेरिका रूस और चीन के बाद भारत विश्व का ऐसा चौथा देश बन गया है जिसमें चंद्रमा पर सफल लैंडिंग की है।जोहांसबर्ग में ब्रिक्स के सम्मेलन में शिरकत करने गए राष्ट्र के प्रधानमंत्री द्वारा सभी देशवासियों को और इसरो की टीम को ऑनलाइन जुड़कर बधाई दी गई।विद्यालय में इस विशेष आयोजित कार्यक्रम के लिए बच्चों के साथ मिलकर एक मॉडल तैयार किया गया जो कि जिले में इस कार्यक्रम के लिए किया गया एक अनूठा और सराहनीय प्रयास है।
नोडल शिक्षिका नीलाक्षी शर्मा व डॉक्टर बिंदु कुमारी गोपाल गोयल द्वारा तैयार की गई
विशेष कार्यक्रम की रूपरेखा नोडल शिक्षिका नीलाक्षी शर्मा व डॉक्टर बिंदु कुमारी गोपाल गोयल द्वारा तैयार की गई जिसमें विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनूप कुमार ने पूरा सहयोग किया और विद्यालय के अन्य अध्यापक गुलशन अलका शर्मा चंद्रभान विनोद मनीष सीमा का योगदान मिला। खंड शिक्षा अधिकारी पंकज चतुर्वेदी द्वारा इस विशेष आयोजन के लिए समस्त स्टाफ को बधाई दी गई और बताया गया कि इस विद्यालय में कुछ समय पूर्व विज्ञान लैब स्थापित की गई थी और यह कार्यक्रम ऐसी विज्ञान लैब स्थापना के उद्देश्यों कोसिद्ध करता हैजिसके माध्यम से बच्चों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में जीआईसी सिंभावली के प्रवक्ता आलोक सारस्वत व मोहिनी सिंह की विशेष गरिमामय उपस्थिति रही।
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