
Hapur hulchul -व्यापार और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है गढ़ कार्तिक गंगा मेला
गढ़ गंगा मेला उत्तर प्रदेश के गढ़मुक्तेश्वर में गंगा नदी के किनारे हर साल कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होता है। इस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आते हैं
और यह व्यापार और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र भी बनता है। मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानों और स्टालों का आयोजन होता है, जो इस प्रकार हैं:
1. पूजा सामग्री की दुकानें: गंगा स्नान और पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे दीप, अगरबत्ती, फूल, माला, प्रसाद, मिट्टी के दीये, धूप, और अन्य पूजा सामग्री की दुकानों की भरमार होती है।
2. मिट्टी के बर्तन और खिलौने: मेले में पारंपरिक मिट्टी के बर्तन, सजावटी वस्तुएं, और मिट्टी के खिलौने भी खूब बिकते हैं। यह खासकर बच्चों और घर की सजावट के लिए होते हैं।
3. हस्तशिल्प और हेंडीक्राफ्ट वस्त्र: कई प्रकार के हस्तशिल्प, हेंडीक्राफ्ट, और कपड़े जैसे कि पारंपरिक साड़ियाँ, कुर्ते, शॉल, और पश्मीना जैसे सामान भी यहां बिकते हैं।
4. खेल और झूले: बच्चों के लिए खेल खिलौने, झूले, और अन्य मनोरंजक गतिविधियों की दुकानों की भी संख्या अधिक होती है।
5. खान-पान और मिठाई की दुकानें: मेले में खाने-पीने की कई दुकानें लगती हैं, जिनमें विशेष रूप से जलेबी, कचौड़ी, समोसा, चाट, मिठाइयाँ, छोले-भटूरे और अन्य स्थानीय व्यंजन उपलब्ध होते हैं।
6. आभूषण और सौंदर्य प्रसाधन: यहां चूड़ियाँ, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, नकली आभूषण, और अन्य सौंदर्य प्रसाधन की दुकानें भी होती हैं, जो महिलाओं को विशेष रूप से आकर्षित करती हैं।
7. पशु मेला: गढ़ गंगा मेले में एक बड़ा पशु मेला भी लगता है, जिसमें पशुओं की खरीद-फरोख्त की जाती है। इसमें घोड़े, ऊँट, बैल, गाय, भैंस और अन्य पशु बिकने आते हैं।
8. खेल और मनोरंजन के स्टाल: मेले में विभिन्न प्रकार के खेल, जादू शो, मौत का कुआँ और अन्य मनोरंजक स्टाल होते हैं जो मेले की रौनक बढ़ाते हैं।
गढ़ गंगा मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण और शहरी लोगों के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक, और व्यापारिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र है।
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