
छठ पूजा का इतिहास, सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का पर्व
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का पर्व है, जिसे विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, और नेपाल में धूमधाम से मनाया जाता है।
यह पर्व स्वास्थ्य, समृद्धि, और परिवार की खुशहाली की कामना के लिए मनाया जाता है। छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला कठिन व्रत है,
जिसमें व्रती (व्रत रखने वाले) बिना अन्न और पानी के उपवास करते हैं और उगते व अस्त होते सूर्य को अर्घ्य (अर्ध्य) देते हैं।
छठ पूजा का इतिहास और पौराणिक मान्यताएं
छठ पूजा का इतिहास और उत्पत्ति स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसके बारे में कुछ प्रमुख पौराणिक मान्यताएं हैं:
1. रामायण का संदर्भ: मान्यता है कि भगवान राम और माता सीता ने अयोध्या वापसी के बाद छठ पूजा की थी। भगवान राम ने कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष में सूर्य देवता की उपासना की थी, जिसे आज छठ पूजा के रूप में मनाया जाता है।
2. महाभारत का संदर्भ: महाभारत के अनुसार, पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने भी अपने परिवार की खुशहाली के लिए छठ व्रत किया था। उन्होंने सूर्य देवता की उपासना की थी, जिससे उनकी मनोकामनाएं पूरी हुईं।
3. छठी मैया की मान्यता: एक अन्य मान्यता के अनुसार छठी मैया को प्रकृति की देवी के रूप में पूजा जाता है,
जो संतान की रक्षा करती हैं और उनकी सेहत और दीर्घायु के लिए आशीर्वाद देती हैं। खासकर महिलाएं छठी मैया की उपासना करके अपने बच्चों और परिवार की सुख-शांति की कामना करती हैं।
4. विज्ञान और प्रकृति का महत्व: सूर्य को ऊर्जा, जीवन और स्वास्थ्य का स्रोत माना जाता है।
छठ पूजा के दौरान सूर्य की उपासना और जल अर्पित करने से सूर्य की किरणों से शरीर को लाभ मिलता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी माना गया है कि यह पूजा शरीर और मन के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।
छठ पूजा क्यों मनाई जाती है
छठ पूजा का मुख्य उद्देश्य सूर्य देव और छठी मैया की कृपा प्राप्त करना है। इसके पीछे कई मान्यताएं और कारण हैं:
स्वास्थ्य और समृद्धि: सूर्य देवता को जीवन का आधार माना गया है, और उनके उपासना से स्वास्थ्य, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
संतान सुख और परिवार की सुरक्षा: छठी मैया की उपासना खासकर महिलाओं द्वारा परिवार की खुशहाली, संतान की दीर्घायु और सुरक्षा के लिए की जाती है।
प्रकृति के प्रति आभार: छठ पूजा में प्रकृति के साथ तालमेल बैठाने का प्रतीक है। इस पूजा में व्रती खुद को प्रकृति के करीब पाते हैं और जल, सूर्य, और अन्य प्राकृतिक तत्वों का सम्मान करते हैं।
छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व भी रखती है। इस पर्व में लोग मिलकर, बिना किसी जाति, धर्म और भेदभाव के एक साथ पूजा करते हैं।
इसका महत्व यह भी है कि यह पर्व गंगा-जमुना तहजीब का प्रतीक है और भारतीय समाज में एकता, सौहार्द, और भाईचारे का प्रतीक है।
इस प्रकार, छठ पूजा का इतिहास और महत्व बहुत पुराना और समृद्ध है, जो भारतीय संस्कृति, धर्म, और परंपराओं से जुड़ा हुआ है।
[banner id="981"]