जिले में गॉल ब्लैडर पथरी के मरीजों की बढ़ी संख्या
जिला अस्पताल में ही एक सर्जन
हापुड़। जिले में गॉल ब्लैडर में पथरी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। पिछले महीने प्राइवेट अस्पतालों में ऐसे करीब 70 मरीजों ने सर्जरी कराई है, जबकि स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में सर्जन ही नहीं हैं। सिर्फ जिला अस्पताल में ही एक सर्जन हैं। ऐसे में गरीब मरीजों की जान आफत में है, क्योंकि निजी अस्पतालों में ऑपरेशन का 50 हजार से एक लाख रुपये खर्च आ रहा है। हापुड़ को जिला बने 11 साल बीत गए हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं का अब तक विस्तार नहीं हो सका है। छह सीएचसी बिना सर्जन चलाई जा रही हैं, इनमें करीब डेढ़ साल से ऑपरेशन तक नहीं हुए हैं। धौलाना सीएचसी के सर्जन को भी जिला अस्पताल से अटैच कर दिया है।
लोगों की पित्त की थैली में पथरी की समस्या बढ़ गई है
गलत खानपान और अन्य कारणों से इन दिनों 35 साल से अधिक आयु वाले लोगों की पित्त की थैली में पथरी की समस्या बढ़ गई है। दूसरे अंगों में भी पथरी के मामलों में इजाफा हुआ है। गॉल ब्लैडर की पथरी होने पर असहनीय दर्द से लोगों की जान निकल रही है लेकिन, सरकारी अस्पतालों में उन्हें सुविधा के नाम पर सिर्फ दर्द निवारक दवाएं दी जा रही हैं।
दूरबीन से ऑपरेशन की भी कोई व्यवस्था नहीं है
जिला अस्पताल में ऑपरेशन तो किए जा रहे हैं, लेकिन आधुनिक पद्धति से यहां की व्यवस्थाएं काफी दूर हैं। दूरबीन से ऑपरेशन की भी कोई व्यवस्था नहीं है। इस अस्पताल में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड मशीन तो दूर अच्छी गुणवत्ता की एक्सरे मशीन तक नहीं है।
[banner id="981"]